राजस्थान की रणभूमि में, है इसका सुंदर निवास,
हरियाली से है घिरा, जिसका मनोरम है आभास।
हर पत्ता, हर फूल यहाँ, शिक्षा का गीत सुनाता,
हर पंक्ति को भी यही स्वर भाता।
विद्या के दीप जलते हैं, गुरुओं के रूप महान,
जो सिखाए हमें उड़ना, और मिटाएँ अज्ञान।
सहायकों का स्नेह भरा हाथ, सदा बना रहे साथ,
हर मुस्कान में छिपी हो जैसे, अपनेपन की बात।
क्या हो या खेल का मैदान, सब में जोश की रेखा,
यहाँ हर लड़की बनती है, नारी शक्ति की रूप रेखा।
हम देते पंख उड़ने को, यही है इसका मान,
हर बालिका बनाती है यहाँ, अपने सपनों की पहचान।
संस्कारों की छाया में, आत्मबल का दीप जले,
बिरला बालिका विद्यापीठ से उज्जवल भविष्य बने।
हमें गर्व है इस मंदिर पर, शिक्षा की यह शान,
जहाँ बनती हैं बेटियाँ, भारत की सच्ची पहचान।
एश्वाप्ति यादव
कक्षा – XI



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