“सारे जहाँ से अच्छा……..!” सफर बिरला बालिका विद्यापीठ, पिलानी से कर्तव्य पथ तक का

“सारे जहाँ से अच्छा…” — यह केवल एक धुन नहीं थी, बल्कि हमारे पूरे सफर की पहचान बन गई थी। बिरला बालिका विद्यालय, पिलानी से कर्तव्य पथ तक का यह सफर उत्साह, मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास से भरा हुआ था।

प्रात: पाँच बजे की ठंडी हवाओं में सरगम की धुन के साथ हमारा दिन शुरू होता था। हम ५१ छात्राएँ, राजकुमार सर और सविता मैम के मार्गदर्शन में निरंतर अभ्यास करतीं। अभ्यास के बाद नाश्ता कर हम करियप्पा ग्राउंड पहुँचते, जहाँ हमारे सामने देश के अन्य चार बैंड खड़े होते। कई बार उन्हें देखकर मन में डर भी पैदा होता और मनोबल डगमगाने लगता। ऐसे समय में राजकुमार सर के शब्द हमेशा हौसला देते — “जब ठान ही लिया है, तो डरना क्यों?”

किसी के पास संसाधन थे, तो किसी के पास बड़े सहयोगी, वहीं हम अपनी मेहनत, लगन, कठिन अभ्यास और ईश्वर पर अटूट भरोसा कर आगे बढ़ते। ऐसा तो बिलकुल नहीं था कि हमें कुछ नहीं आता थाl बिरला बालिका विद्यापीठ में सुधीर सर और राजकुमार सर से मिले कठिन प्रशिक्षण से हमें यह विश्वास था कि जो सीखा है, वही हमें आगे ले जाएगा। वही हमारी ताकत बन गया, इस कारण हमने कभी सिर नहीं झुकाया और इसी आत्मविश्वास के साथ आर्मी चीफ और नेवल चीफ के सामने डिस्प्ले देने का अवसर भी मिला।

वो कहते है न “अभ्यास ऐसा करें मानो कि कभी विजय का स्वाद न चखा हो और प्रदर्शन ऐसा करें जैसे कभी हारे न होंl ” बस वही था, सख्त अनुशासन और कठिन अभ्यास के दौरान सोचते कि हमसे न होगा लेकिन प्रस्तुति ऐसी देते कि इससे तो अच्छा कुछ हो ही नहीं हो सकताl बस देखने वाले दंग रह जाते!

67वें पिलानी बैंड की मुश्किलें समाप्त नहीं हुई थीl हम कर्तव्य पथ पहुँच तो गए पर हमारी प्रस्तुति निश्चित नहीं थीl मन में भय था, प्रतिस्पर्धा कठिन थी, चुनौती बड़ी थी, पर हमारे जोश में कोई कमी नहीं थी। अपने पहले करियप्पा अभ्यास के दौरान हम मिले रमनदीप सर से! उस क्षण ऐसा लगा जैसे पूरी दुनिया एक तरफ और पिलानी बैंड एक तरफl कोई कुछ कहता तो कोई कुछ, लेकिन जब डी.जी. सर ने एनसीसी दल से पूछा तो समवेत् स्वर में एक ही शब्द गूंज उठा- ‘पिलानी बैंड‘!

23 जनवरी को हमारा एफ.डी.आर. था, लेकिन उस दिन इंद्रदेव ने अपनी कृपा इतनी बरसाई कि बारिश ने रुकने का नाम ही न लिया, पर एफ.डी.आर. तो देना ही था, तो चल पड़ा एक बार फिर पिलानी बैंड भीगते हुए “यंग इंडिया” की धुन पर! यही वह क्षण था जिसने 26 जनवरी के रास्ते को तय किया। और फिर वह गौरवपूर्ण दिन आया — 26 जनवरी। सवा ग्यारह बजे “कदम-कदम बढ़ाए जा” और “सारे जहाँ से अच्छा” की धुन पर हमारी लीडर ने दी सलामी और हम हो गए कर्तव्य पथ पर मार्च!

वह पल केवल प्रस्तुति नहीं, बल्कि हमारी मेहनत, विश्वास और सपनों की जीत था। गणतंत्र दिवस का यह सफर सचमुच सुहाना था — कुछ मीठा, कुछ खट्टा और बहुत कुछ दिल को छू लेने वाला। राजकुमार सर का साथ हमारे लिए प्रेरणा था और सविता मैम का स्नेह हमारा संबल। और शायद यही नियति थी कि 26 जनवरी को इंडिया गेट तक हमें पहुँचना ही था — क्योंकि यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि एक सपना था जो सच हो गया।

अदिति सिंह

कक्षा-IX A


Comments

6 responses to ““सारे जहाँ से अच्छा……..!” सफर बिरला बालिका विद्यापीठ, पिलानी से कर्तव्य पथ तक का”

  1. Deepak Kumar

    Great! Your dedication and hard work have led to this prestigious achievement. So proud of you. Congratulations dear……

    1. Hindi & Sanskrit Department

      Thank you So much. Your motivational words are precious to us.

  2. S Narayan

    Spectacular performance by you and team ! Keep it up !!

  3. Excellent work, Aditi! Writing such a deep and emotional article in Class IX shows how talented you are. The Pilani Band has made us all proud, and your writing has made that moment immortal.”

    A masterfully written article, Aditi! You captured the essence of struggle and success perfectly. Your journey to India Gate is a dream come true for all of us. Way to go!”

    Congratulation My dear sweet heart

    God bless you

  4. Congratulations to you and your colleague, Happy (Aditi Singh), on this wonderful achievement. Keep up the fantastic work—we’re really proud of you!

  5. Hindi & Sanskrit Department

    Thank you So much. Your motivational words are precious to us.

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